• त्यौहारों में तकनीक

    देश के बड़े-बड़े मंदिरों का 'वर्चुअल दर्शन' और वहां होने वाली पूजा-आरती को घर बैठे देखा जा सकता है

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    - अमिताभ पाण्डेय

    देश के बड़े-बड़े मंदिरों का 'वर्चुअल दर्शन' और वहां होने वाली पूजा-आरती को घर बैठे देखा जा सकता है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब हमें ई-स्नान की तरफ बढ़ना होगा। धार्मिक स्थलों के आसपास, नदियों के आसपास होने वाली भीड़ को कम करने के लिया यह उचित होगा। देश के अन्य राज्य भी चाहें तो पश्चिम-बंगाल सरकार की तरह अपने-अपने राज्यों की नदियों पर होने वाले स्नान की भारी भीड़ को रोकने के लिए ई-स्नान का प्रावधान कर सकती हैं। 

    भारत एक पर्व त्यौहारों का देश है जहां लगभग हर दिन किसी-न-किसी धर्म, समाज, संप्रदाय का कोई छोटा-बड़ा त्यौहार होता रहता है। हमारे देश में पर्व-त्यौहारों को मिल-जुलकर सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा रही है। हर त्यौहार पर लोगों का बड़ी संख्या में एकत्र होना आदत बन गया है। अनेक त्यौहार ऐसे हैं जिनमें सामूहिक रूप से नदी, तालाब किनारे स्नान किया जाता है। मकर सक्रांति, छठ पूजा, कुंभ, सिंहस्थ, माघ मेला, गंगासागर मेला जैसे अनेक धार्मिक आयोजन हैं। इनमें हजारों की संख्या में लोग एकत्र होते हैं। ऐसे धार्मिक अवसर पर पवित्र नदियों में मौसम की परवाह किए बिना श्रद्धालु अलसुबह से ही स्नान-ध्यान करने लगते हैं।

    इस बार भी पर्व-त्यौहार अपनी नियत तिथियों पर आ रहे हैं, लेकिन दुनिया भर में फैली बीमारी कोविड-19 के कारण लोग घर से निकलने में डर रहे हैं। यह ऐसी बीमारी है जिसके दिखाई ना देने वाले सूक्ष्म वायरस किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं। ऐसे में सावधानी रखना, भीड़ से बचना बहुत जरूरी है। सरकार और समाज ने कोरोना से बचने के लिए घर में रहें, सुरक्षित रहें यह अपील की है। कोरोना संक्रमण से अपने को, अपने परिवार को बचाए रखने के लिए हमें भीड़ भरी जगहों पर जाने से बचना होगा। सार्वजनिक आयोजन से दूर रहना होगा।

    धार्मिक त्यौहार भी सबके साथ मिलकर मनाने के बजाय अपने घर में ही रहकर मनाने होंगे। उल्लेखनीय है कि मकर सक्रांति, सोमवती अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा, छठ पूजा जैसे अनेक अवसर पर हमारे देश की पवित्र नदियों में स्नान की परंपरा रही है। इन पवित्र नदियों में क्षिप्रा, नर्मदा, ताप्ती, गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरी सहित अनेक नदियां शामिल हैं। मकर सक्रांति के मौके पर इन पवित्र नदियों में हजारों की संख्या में लोग स्नान करते हैं। इलाहाबाद में तीन पवित्र नदियों के संगम पर होने वाला माघ मेला, सोमवती अमावस्या- मकर सक्रांति- कार्तिक पूर्णिमा पर उज्जैन की क्षिप्रा नदी का स्नान, होशंगाबाद में नर्मदा नदी किनारे बांद्राभान मेला, ऋ षिकेश- हरिद्वार में लक्ष्मण -झूला, हर की पौड़ी के समीप गंगा नदी में होने वाला स्नान बहुत प्रसिद्ध है। इन दिनों ऐसे स्थानों पर लगने वाली भारी भीड़ से कोरोना की बीमारी फैलने की सम्भावना अधिक होगी। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए, स्नान के लिए आने वाली भारी भीड़ को रोकना स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बहुत जरूरी है।

    इसे ध्यान में रखते हुए पश्चिम-बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अच्छा प्रयास किया था। उन्होंने श्रद्धालुओं से गंगासागर मेले में आकर स्नान करने और भीड़ बढ़ाने की बजाय अपने घर पर ही रहकर स्नान करने की अपील की थी। सुश्री बनर्जी ने कहा था कि कोरोना के खतरे से बचते हुए गंगासागर मेले के पवित्र अवसर पर घर में ही स्नान करें। उन्होंने अत्यंत कम खर्च में श्रद्धालुओं को गंगाजल के साथ कपिल मुनि के आश्रम का प्रसाद भी घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था की थी। इसके लिए श्रद्धालुओं को 'गंगासागर डॉट.इन' वेबसाइट पर आर्डर देने के बाद स्नान की सामग्री उनके घर पहुंचाई गई थी। इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने टोल फ्री हेल्पलाइन नम्बर जारी किया था। इस पर फोन करके देश-विदेश का कोई भी नागरिक गंगासागर मेले सम्बन्धी ई-स्नान के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता था।

    यहां यह बताना जरूरी होगा कि अजय कुमार डे नामक नागरिक ने कोलकाता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें गंगासागर मेले में स्नान के लिए आने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को कोविड़-19 को देखते हुए रोकने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णन ने यह निर्देश दिया था कि राज्य सरकार ई-स्नान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रचार अभियान चलाए। अदालत के निर्देश के अनुसार सरकार ने गंगासागर मेला के लिए आम जनता से ई-स्नान की अपील की थी। यदि ऐसा ही ई-स्नान आगामी दिनों में अन्य राज्यों की सरकारें पर्व-त्योहारों-मेलों के लिए लागू कर दें तो इससे कोरोना संक्रमण को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। ई-स्नान से आम आदमी का स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा। उल्लेखनीय है कि मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे नए-नए संक्रामक रोगों को देखते हुए हमें अत्यंत सतर्क रहने की जरूरत है। 

    अब समय आ गया है कि हम अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राचीन परंपराओं में समय और देश-काल को ध्यान में रखते हुए बदलाव करें। अब नई तकनीक के सहारे बहुत से काम अत्यंत सुविधाजनक तरीके से और सुरक्षित हो रहे हैं। हमें अपनी धार्मिक मान्यताओं में भी नई तकनीक को बढ़ावा देना चाहिए। इन दिनों कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट, टेलीविजन आदि के माध्यम से दर्शकों को घर बैठे यह सुविधा है कि वे देश के किसी भी सुप्रसिद्ध मंदिर-मस्जिद- गुरुद्वारे-चर्च-बौद्ध मठ अथवा अन्य किसी धर्म-संप्रदाय के धार्मिक स्थल का दर्शन कर सकते हैं। वहां होने वाली पूजा, प्रार्थना, आराधना का लाभ अपने घर पर बैठ कर ले सकते हैं।

    देश के बड़े-बड़े मंदिरों का 'वर्चुअल दर्शन' और वहां होने वाली पूजा-आरती को घर बैठे देखा जा सकता है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब हमें ई-स्नान की तरफ बढ़ना होगा। धार्मिक स्थलों के आसपास, नदियों के आसपास होने वाली भीड़ को कम करने के लिया यह उचित होगा। देश के अन्य राज्य भी चाहें तो पश्चिम-बंगाल सरकार की तरह अपने-अपने राज्यों की नदियों पर होने वाले स्नान की भारी भीड़ को रोकने के लिए ई-स्नान का प्रावधान कर सकती हैं। 

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